ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से व्याप्त है। त्याग भावना से भोग करो, किसी के धन का लोभ मत करो।
प्रज्ञा, प्रकृति और प्रगति का समन्वय
भारतीय ज्ञान प्रणालियों को पुनर्जीवित करते हुए, शिक्षा, शोध और ग्रामीण नवाचार के माध्यम से एक आत्मनिर्भर और मूल्यनिष्ठ समाज का निर्माण।
समदर्शन फाउंडेशन एक विधिवत पंजीकृत, गैर-लाभकारी और बहु-विषयी संगठन है। हमारी स्थापना 'समदर्शन' के मूल विचार पर हुई है — एक ऐसा समतामूलक और जागरूक दृष्टिकोण जो परंपरा और आधुनिकता के मध्य संतुलन स्थापित करे।
हम शिक्षा, शोध, ग्रामीण नवाचार और नेतृत्व विकास के क्षेत्रों में एक 'थिंक-टैंक' और 'एक्शन-ग्रुप' के रूप में कार्य करते हैं। हमारा मंच जाति, मत और पंथ की सीमाओं से परे, समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए समान रूप से खुला है।
समदर्शन फाउंडेशन द्वारा आयोजित होने वाले हमारे आगामी कार्यक्रमों की झलक
वेदों, उपनिषदों और गीता से संकलित कालजयी श्लोक — प्रत्येक पृष्ठ पर प्राचीन ज्ञान की एक किरण
वेद · उपनिषद · गीता
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से व्याप्त है। त्याग भावना से भोग करो, किसी के धन का लोभ मत करो।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में कभी नहीं। न तो तुम कर्मफल के कारण बनो, न अकर्म में तुम्हारी आसक्ति हो।
सत्यमेव जयते नानृतं
सत्येन पन्था विततो देवयानः।
सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य के मार्ग से ही देवलोक का पथ प्रशस्त होता है।
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।
सभी दिशाओं से उत्तम विचार हमारे पास आएं। ज्ञान किसी सीमा में बाँधा नहीं जा सकता — यह विश्वव्यापी है।
विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह।
अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययामृतमश्नुते॥
जो विद्या और अविद्या दोनों को एक साथ जानता है, वह अविद्या से मृत्यु को पार कर विद्या से अमृतत्व प्राप्त करता है।
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥
विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते और चाण्डाल — सभी में पण्डित 'समदर्शन' रखते हैं। यही हमारी प्रेरणा है।
एक ऐसे समर्थ भारत का निर्माण, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से ऊर्जा प्राप्त करे और आधुनिक प्रशासनिक दक्षता व वैज्ञानिक शोध से विश्व पटल पर नेतृत्व प्रदान करे। हम एक आत्मनिर्भर, मूल्यनिष्ठ और प्रकृति-सजग समाज के प्रति संकल्पबद्ध हैं।
भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) को समकालीन विमर्श और अकादमिक ढांचे में पुनर्स्थापित करना।
युवाओं और पेशेवरों को मूल्य-आधारित कौशल और नेतृत्व प्रदान करना।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आधुनिक तकनीक और पारंपरिक बुद्धिमत्ता के संगम से सुदृढ़ करना।
प्रकृति के साथ सामंजस्य रखने वाले विकास मॉडल विकसित करना।
हम शिक्षा से पर्यावरण तक — एक समग्र दृष्टिकोण से समाज के प्रत्येक पहलू को सशक्त बनाते हैं
भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर शोध और विमर्श — प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, गणित और सस्टेनेबिलिटी में प्राचीन ज्ञान का आधुनिक अनुप्रयोग।
जैविक खेती, स्मार्ट एग्रीकल्चर और ग्राम-उद्यमिता के माध्यम से 'आत्मनिर्भर ग्राम' की संकल्पना को साकार करना।
'ग्लोबल विजन' और 'लोकल रूट' — प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक उद्यमिता और सर्वांगीण व्यक्तित्व का परिष्कार।
जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरणीय चेतना प्रसार — आधुनिक जीवनशैली और प्रकृति के बीच संतुलन।
हमारा मानना है कि शिक्षा केवल सूचना का हस्तांतरण नहीं, बल्कि बोध का जागरण है। समदर्शन फाउंडेशन ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में बच्चों को मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान करता है, जो उन्हें न केवल पुस्तकी ज्ञान देती है बल्कि संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन-कौशल भी सिखाती है।
हमारी प्रत्येक परियोजना 'डेटा' और 'धरातलीय प्रभाव' के मापदंडों पर परखी जाती है — सिर्फ आँकड़े नहीं, वास्तविक बदलाव।
हम एक सुदृढ़ विधिसम्मत और पारदर्शी प्रशासनिक प्रणाली का पालन करते हैं, जो जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
CSR पार्टनर्स, सरकारी निकायों, विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक 'इकोसिस्टम' की तरह कार्य।
चाहे आप शिक्षक हों, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता या एक जागरूक नागरिक — समदर्शन के इस अभियान में आपका स्वागत है।